विपक्ष के साथ बैठक से अचानक उठे ट्रम्प, कहा- टोटल वेस्ट ऑफ टाइम

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प उनकी विवादित अमेरिकी-मेक्सिको सीमा दीवार योजना के लिए 5.7 अरब डॉलर की राशि आवंटित करने से इनकार किए जाने के बाद शीर्ष डेमोक्रेटिक नेताओं नैंसी पेलोसी एवं चक शुमर के साथ बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए.

ससे पहले ट्रम्प ने विपक्षी पार्टी के धन आवंटन के लिए राजी नहीं होने की स्थिति में राष्ट्रीय आपातकाल लागू करने की धमकी दी थी ताकि वह अवैध आव्रजकों को देश में आने से रोकने के लिए दीवार या अवरोधक बनाने की अपनी योजना को क्रियान्वित कर सकें.

ट्रम्प ने प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैंसी पेलोसी और सीनेट में अल्पमत के नेता चक शुमर से पूछा कि यदि आंशिक रूप से बंद पड़े सरकारी कामकाज को फिर से शुरू कर दिया जाए तो क्या वे आगामी 30 दिनों में सीमा दीवार के लिए राशि आवंटित किए जाने के कदम का समर्थन करेंगे. पेलोसी ने जब ‘नहीं’ में इसका जवाब दिया तो ट्रम्प नाराज हो गए.

नाराज ट्रम्प ने ट्वीट किया, 'मैं चक और नैंसी के साथ बैठक बीच में छोड़कर आ गया. समय की पूरी बर्बादी थी. मैंने पूछा कि यदि हम कामकाज फिर से शुरू कर दें तो 30 दिन में क्या आप दीवार या स्टील अवरोधक समेत सीमा सुरक्षा को मंजूरी देंगे? नैंसी ने कहा, नहीं. मैंने अलविदा कह दिया. और कुछ नहीं किया जा सकता था.'

ट्रम्प के बैठक के बीच से ही चले जाने से अमेरिका में राजनीतिक अस्थिरता का नया दौर शुरू हो गया है. ट्रम्प के बर्हिगमन के बाद नैंसी और शुमर ने संवाददाताओं से कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता किसी भी हाल में सीमा दीवार के लिए धन आवंटित करने के इच्छुक नहीं हैं.

उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी इस मामले में अपना रुख नहीं बदलेगी. पेलोसी ने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि बैठक कक्ष में माहौल अच्छा नहीं था. शुमर ने कहा कि ट्रम्प की बात नहीं मानी गई और वह बैठक से चले गए.

इससे पहले ट्रम्प ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय आपातकाल लगाना अंतिम विकल्प है लेकिन यदि विपक्षी दल के नेता सीमा दीवार के लिए धन आवंटित नहीं करते हैं, तो वह आपातकाल लागू कर सकते हैं.

इस बीच, ट्रम्प ने देश में 'वास्तविक आव्रजन सुधार' की आवश्यकता की बात की और तर्क दिया कि विश्वभर से प्रतिभाशाली लोगों को तलाश कर रहीं अमेरिकी कंपनियों की प्रगति के लिए यह अहम है. उन्होंने हालात मे सुधार के लिए एक 'बड़े आव्रजन विधेयक' को लाने की भी बात की. अमेरिका के राष्ट्रपति ने कहा, 'हम देश में वास्तविक आव्रजन सुधार देखना चाहते हैं क्योंकि हमें इसकी आवश्यकता है और यह अच्छी चीज होगी.'

विधेयक को प्रवर समिति में भेजने के द्रमुक सदस्य कनिमोई सहित कुछ विपक्षी दलों के प्रस्ताव को सदन ने 18 के मुकाबले 155 मतों से खारिज कर दिया. इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा में कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों द्वारा इस विधेयक का समर्थन करने के बावजूद न्यायिक समीक्षा में इसके टिक पाने की आशंका जताई गई और पूर्व में पी वी नरसिंह राव सरकार द्वारा इस संबंध में लाये गये कदम की मिसाल दी गई. कई विपक्षी दलों का आरोप था कि सरकार इस विधेयक को लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर लाई है. अन्नाद्रमुक सदस्यों ने इस विधेयक को 'असंवैधानिक' बताते हुए सदन से वॉकआउट किया.

विधेयक पर हुयी चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा ने सवाल किया कि ऐसी क्या बात हुई कि यह विधेयक अभी लाना पड़ा? उन्होंने कहा कि पिछले दिनों तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि इन विधानसभा चुनावों में हार के बाद संदेश मिला कि वे ठीक काम नहीं कर रहे हैं.

चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आर्थिक आधार पर सामान्य वर्ग को आरक्षण देने के मोदी सरकार के फैसले को मैच जिताने वाला छक्का बताते हुये कहा कि अभी इस मैच में विकास से जुड़े और भी छक्के देखने को मिलेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार ने यह साहसिक फैसला समाज के सभी वर्गों को विकास की मुख्य धारा में समान रूप से शामिल करने के लिए किया है.

उन्होंने इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा पर कहा कि आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा संविधान में नहीं लगाई गई है. उच्चतम न्यायालय ने यह सीमा सिर्फ पिछड़े वर्ग और अनुसूचित जाति एवं जनजाति समूहों के लिए तय की है.

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